पर अब साथ-साथ चल, मेरे पिछे-पिछे मत चल। क्योंकि गांव नजदीक आ गया है। कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा ?”,
कह कर मुस्कुरने लगी। मैने भी समझदार बच्चे की तरह अपना सिर हिला दिया और साथ-साथ चलने लगा। मां धीरे-से फुसफुसाते हुए बोलने लगी,
“घर चल, तेरा बापु तो आज घर पर है नही। फिर आराम से जो भी देखना है, देखते रहना।