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“हाँ. . . रोमा बहुत सुन्दर लगती हो. . . . ” कैहकर जय ने अपने होंठ रोमा के होंठों पर रख दिये. थोडी देर उसके होंठों को चूसने के बाद जय ने उसके होंठों को खोल अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी. किसी भावेश में रोमा ने भी अपने होंठ खोल दिये और उसकी जीभ को अपने मुंह में ले लिया. दोनो की जीभ एक दूसारे से मिल खेलने लगी.

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