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और तब मुझे अहसास हुआ कि सानिया कुँवारी कली थी और मैंने उसकी सील तोड़ी अभी-अभी। बिस्तर पर उसकी कुँवारी चूत की गवाही के निशान बन गए थे, बल्कि अभी और बन रहे थे। मैं समझ गया कि कितनी तकलीफ़ हुई है सानिया को, सो अब मैंने उसको पुचकारा- हो गया बेटा हो गया सब, अब कुछ दर्द ना होगा कभी। रागिनी भी उसके बाल सहला रही थी- सच दीदी, अब सब ठीक है, इतना तो सब लड़की को सहना होता है.

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