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“परेशान क्यों हो रही हो रोमा, आराम से मज़े लो. . . . . ” जय उसकी चुचियों को और जोर से मसलते हुए बोला. रोमा की समझ में नही आ राहा था की वो क्या करे. जय ने उसे ज़मीन पर लिटा दिया और उस पर झुकते हुए उसके होंठों को जोरों से चूस राहा था साथ ही उसकी चुचियों को भी मसल राहा था. जब उसने अपना हाथ उसकी शौट्र्स पर से उसकी चूत पर रखा, रोमा डर सिहर उठी.

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