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जय ने उसकी शौट्र्स की ज़िप खोलनी चाही तो वो धीमी आवाज़ में बोल् पडी, “रुक जाओ जय प्लीज़. . . . . . . . ” पर जय को पता था की रोमा अभी भी अन्दरूनी तनाव से झगड रही है. उसने रोमा के होंठों पर अपनी उंगली रख कर उसे चुप कर दिया और उसका हाथ पकड कर अपनी पैंट के ऊपर से अपने लन्ड पर रख दिया. रोमा ने अपनी आँखें बन्द कर ली और नशे की अवसथा में उसे कुच्छ समझ में नही आ राहा था.

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