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उसने लंड को चाटकर तुंरत ही फिर से घोड़े जैसे किया और बोली- राजा आ जा और चोद मुझे, फाड़ दे मेरी चूत को, बहुत तड़पा रही है मुझे, चूस मेरे इन बब्बो को दबा दबा के और पूरा दूध पी लो इनका !

आज मेरे लंड राजा को सविता की चूत मुबारक हो !

मैंने भी तुंरत लंड को चूत पे रखा और धीरे से धक्का दिया, पर सविता की कसी हुई कुंवारी चूत में मेरा घोड़े वाला लंड थोड़े ही आसानी से जाता !

वो तो चुदवाने के लिए मरी जा रही थी- हरामखोर ! खुली हुई चूत है, फिर भी तड़पा रहा है, डाल जल्दी से मुझसे नहीं रहा जाता है अब तो !भोसड़ा बना मेरी कुंवारी चूत को !

दो धक्के में लंड चूत में समां गया, सविता दर्द से कराह उठी लेकिन बोली- राजा छोड़ो मत ! चोदों मुझे !

८-१० धक्कों में ही वो मस्त हो गई और गांड उठा उठा के मजे लेने लगी।

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