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एक घण्टे बाद हम तीनों एक साथ सो गए। बीच में नवीन सोया था। मेरी आंखों से नींद गायब थी। मैं कैसे भी निशु को चोदना चाहता था। रात के करीब दो बजे निशु बिस्तर से उठ कर बाथरूम जा रही थी, मैं भी उठा, उसके पीछे पीछे बाथरूम में घुस गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में ले लिया। पहले तो वो घबराई, ऐसे दिखाने लगी कि रात वाली घटना से अन्जान हो, लेकिन मैं पूरे जोश में था, जैसे ही उसकी चूत पर हाथ रखा, वो चिहुंक गई और अपनी आंखें बंद कर ली,”प्लीज़ रंजन भैया मत करो ! मुझे कुछ होता है !”

“क्या होता है?”

“पता नहीं लेकिन बहुत अच्छा लगता है !”

“अब और मज़ा आएगा मेरी प्यारी निशु ! साथ दोगी?”

“हां ! लेकिन मैं गर्भवती तो नहीं हो जाऊंगी?”

“नहीं”

मैंने उसकी चूची पर हाथ रखा ओर आहिस्ते से सहलाने लगा।

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