तब मैं रेस्ट रूम में सुस्ताने आ गयी। रमेश ने भी अपना काम निपटा लिया और वहीं रेस्ट रूम में आ गया। उसे देखते ही मेरा शरीर कसमसाने लगा। रमेश ने मुझे आंख मारी ……… मैं शरमा गयी। उसने मुझे गले लगाते हुये और मेरे शरीर को अपने शरीर से चिपकाते हुए शरारत से कहा,” सुमन जी…आंख मारी है अभी …… और तो कुछ नहीं मारी ना……बस शरमा गयी…?”
“और क्या मारोगे…?” मैं शरमाते हुए बोली।