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डिनर करके जो ने बाहर का जायज़ा लिया तो बरसात तेज़ हो रही थी। होटल के मालिक ने जो को चाबी ला कर दे दी और कुछ समझाया। जो ने कहा,”आज तो यहीं सोना पड़ेगा। रास्ता भी बन्द हो गया है. . . चलो सभी ऊपर उन्हीं कमरों में चलो. . . ”

मजबूरी थी रुकने की, पर हमें उससे कोई मतलब नहीं था. . . हम तो आये ही घूमने के लिए थे।

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