About:

मेरे चूतड़ों को किसी ने दबाया था। और अब वो चूतड़ों की दरार में हाथ घुसा रहा था। “हाँ जी. . . जो ! पकड़ा गये ना. . . ” जैसे ही मैंने लाईट जलाई वहाँ कोई नहीं था। पर जो के कमरे का परदा हिल रहा था। बरसात बन्द हो चुकी थी। मैं उठ कर दरवाजे तक गई और झाँक कर देखा तो जो तो आराम से सो रहा था. . . मैने सोचा- साला ! जो ! नाटक कर रहा है.

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