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मेरी चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ गहराई में बैठ गया। मैं इतना तगड़ा लण्ड पा कर निहाल हो गयी। “हाय जो. . . . . . क्या लन्ड है यार. . . इतना मोटा. . . हाय इतना लम्बा. . . तुने तो आज मुझे मस्त कर दिया. . . ”

उसका लण्ड फिर से बाहर निकला और फिर से सरसराता हुआ अन्दर बैठ गया. . . मैंने जोश में रुमाल हटाने की कोशिश की पर उसने तुरन्त ही फिर से मेरे मुँह को ढाँक दिया।

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