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अब महेश अपनी जीभ, होंठ, नाक, ठुड्डी और उँगलियाँ, इन सभी का आनंद चंदा कि चूत को दे रहा था. उसे भी इसमें खूब मज़ा आ रहा था. चंदा कि चूत रिसती जा रही थी जिसे महेश पीता जा रहा था. उसका रस हल्का नमकीन और बहुत हल्का खट्टा भी था और उसकी खुशबु नशीली और मजेदार थी. दोनों एक दुसरे को चूसते और चाटते रहें. चंदा ने तो जैसे महेश के सर को अपनी जाँघों के बीच जकड लिया था और उसे अपनी चूत में दबाए जा रही थी.

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