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गजब की सुन्दर थी और बड़ा ही मादक और खूबसूरत बदन था उसका ! बिल्कुल अनछुई और कच्ची कलि थी !

मेरी कई गर्ल फ्रेंड से भी ज्यादा सेक्सी और सुन्दर थी वो ! शायद यही वजह थी कि मैं एक नौकरानी की कमसिन जवानी पर मर मिटा था ! तब मेरा घर के बाहर ही जनरल स्टोर हुआ करता था ! और जनरल स्टोर में भी सरोज ही साफ सफाई किया करती थी ! जब भी वो झुक कर झाड़ू-पौंछा करती थी तब मैं उसके बड़े-बड़े, गोरे-गोरे और कसे स्तन देखता था, बाथरूम में जाकर उसको चोदने का सोच सोच मुठ मारता था, पर उससे बात कैसे करूँ, कैसे उसे चोदूँ, उसकी छोटी सी गुलाबी चूत कैसी होगी? यही सोचता रहता था !

एक बार जब मेरी मम्मी कुछ दिनों के लिए नानी के घर गई तो मेरे छोटे भाई बहन को भी साथ में लेकर गई, पापा भी रोज सवेरे अपने काम पर चले जाते थे।

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