तो मैंने सोचा कि यही समय हैं सरोज से दोस्ती करने का ! बात बन गई तो अच्छा नहीं तो किसी को पता भी नहीं चलेगा !
मैंने धीरे-धीरे काम के बहाने से ही उससे बातचीत चालू की, बीच बीच में उसे हँसाने की भी कोशिश करता था, उसे भी शायद अच्छा लगता था। एक-दो दिन में उससे अच्छी दोस्ती हो गई। मैं कभी-कभी मजाक में उसके ऊपर और उसके कसे कमीज़ पर थोड़ा सा पानी डाल देता था।