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मुझे अब बिल्कुल भी दर्द नहीं होता। करीब नौ बजे रागिनी चली गई। सानिया ने उससे वादा लिया कि वो फ़िर एक बार आयेगी, तब शुक्रवार को आने की बात कही, क्योंकि शनि और रविवार को राजिन्दर उसकी मेरे साथ बुकिंग के बाद एक घन्टे में अगले 5 सप्ताह की बुकिंग कर चुका था। मुझे भी रागिनी बहुत अच्छी लगी थी। जाते-जाते वो मुझे कह गई- अंकल आपको जब मन हो, फ़ोन कर दीजिएगा, सूरी सर वाले दिन छोड़ कर ! चली आऊँगी, अब आपसे पैसे नहीं लूँगी, आपने सच मुझे बहुत इज्ज्त और प्यार दिया, धन्यवाद।

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