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उसकी गीली चूत का नमकीन स्वाद मस्त था। साली खूब मस्त हो कर अपना चूत चटवा रही थी। एक बार पानी भी छोड़ा, पर थोड़ा सा। इसके बाद वो थोड़ा शान्त हो गई। तब मैंने पूछा- क्या हाल है? कैसा लगा इस चूतिया चाचा के मुँह का मजा?

बेचारी कुछ बोल न सकी, बस हाँफ़ती रही, और मुझे समझ आ गया कि बछिया अब हार चुकी है। मैं एक बार फ़िर साँड बन कर बछिया पर चढ़ गया और सिर्फ़ उसके चेहरे पर नजर गड़ा कर साली की जोरदार चुदाई शुरु कर दी।

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