अब उसकी ससदी को कमर तक खीच चुका था और उसके हाथ उसकी झांटों से मुलाकात कर रहा था. चंदा समझ नहीं पा रही थी कि महेश के मन में क्या है. तभी महेश उसके कान में फुसफुसाया,
ऐसे ही रहना, पलटना मत. वह चाहती तो थी, लेकिन नहीं पलटी. उसे भी हल्का हल्का रोमांच हो रहा था. वह देखना चाहती थी कि महेश आखिर क्या नया करने वाला है.