थोडी देर में विजय भी आ पहुंचा। कमरे में मुझे देख कर चौंक गया। मैने उसे बताया कि डा. के. सक्सेना मैं ही हूँ। विजय हंस पडा…… “मैने सोचा कि जाने ये डा. के. सक्सेना कौन है…”
“क्यों… मेरा नाम नहीं पता था क्या ?”
“नहीं… मुझे किसी पुरुष का नाम लगा… पर ये तो आप ही निकली…लेकिन आप ओर मैं एक ही कमरे में……?”
“कोई कमरा खाली नहीं है … इसलिये मैने मेरे साथ ही आपका नाम लिखवा दिया…”
थोड़ी ही देर में चाय नाश्ता आ गया।