मैं उसके उभारों को दबाती रही…उसकी सिसकियां बढती रही… मैने अब उसकी उत्तेजना देख कर उसका ब्लाऊज उतार दिया… उसने कुछ नहीं कहा… मैने भी यह देख कर अपने कपडे तुरन्त उतार दिये। अब मैं उसकी चूत पर अपनी उंगली से दबा कर सहलाने लगी… और धीरे से एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। उसके मुख से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी…
“आशा … हाय कितना मजा आ रहा है… है ना…”
“हां दीदी… हाय रे… मैं मर गयी…”
“लन्ड से चुदोगी आशा… मजा आयेगा…”
“कैसे दीदी … लन्ड कहां से लाओगी…”
“कहो तो सुनील को बुला दूं … तुम्हे चोद कर मस्त कर देगा”
“नहीं …नहीं … साब से नहीं …”
“अच्छा उल्टी लेट जाओ … अब पीछे से तुम्हारे चूतड़ भी मसल दूं…”
वो उल्टी लेट गयी।