”
पता नहीं मेरे अन्दर कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैं बोला “पिलाना है तो दूध पिलाओ। ”
आंटी तुंरत समझ गई और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोलीं “शर्म नहीं आती ऐसे कहने में। ”
मैं बोला “आंटी शर्म करूँगा तो आप दूध कैसे पिलाओगे। ”
इतना कहकर मैंने आंटी के मम्मों पर हाथ रखा और सहलाने लगा. आंटी भी शायद मुझसे चुदवाने को तैयार थीं इसीलिए कुछ नहीं बोलीं मैंने उनका गाउन उतारा और फ़िर ब्रा और पैंटी भी उतार दी.