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शाम साढ़े सात बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैंने बात छेड़ दी- आज तो सानिया बेटी, तुमने कमाल कर दिया। वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कह दिया- बिना धुली ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी। वो शर्माने लगी, तो मैंने कहा- सच्ची बोल रहा हूँ, मैंने सूँघ कर देखा था। तुम्हारे बाप की उम्र का हूँ, पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू ने मेरे दिल में अरमान जगा दिये।

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