भीतर का नन्हा सा गुलाबी फ़ूल सामने दिख रहा था। मैं उसकी खुली टाँगों के बीच आ गया और अपने 72 किलो के बदन को उसके ऊपर ले आया। फ़िर अपने बाँए हाथ से थूक निकाला और अपने लण्ड की फ़ूले हुए सुपारे पर लगा कर लण्ड रागिनी की बुर पर टिका लिया, पूछा- पेल दूँ अब भीतर रागिनी?
उसका सिर हाँ में हिला। ठीक है फ़िर चुदो बेटा ! कहते हुए मैंने लण्ड भीतर ठाँसने लगा।