About:

मैंने बुआ को सांत्वना देते हुए कहा- एक दिन मैं फूफा को भी सही रास्ते पर ले आऊंगा। बुआ एक बार फिर फफक पड़ी। मैंने अपने होंठों से बुआ की गालों पर आये आँसूओं को पीते हुए अपने होंठ बुआ के होंठों पर रख दिए। फिर तो एक प्यासी औरत और एक जवान लड़का दीन-दुनिया को भूल कर एक दूसरे में समाते चले गए। कब कपड़ों ने हम दोनों के शरीर को छोड़ दिया पता ही नहीं चला।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*