सच में कोई ना था। आह . . . क्या सपना देखा था। नहीं . . . नहीं . . . ये पेटीकोट तो अभी तक चूत के ऊपर तक उठा हुआ है . . . मेरे स्तन पूरे बाहर आ गये थे . . . मतलब वो यहां आये थे ?
अगले दिन सुरेश जी के चेहरे से ऐसा नहीं लग रहा था कि उनके द्वारा रात को कुछ किया गया था। वे हंसी मजाक करते रहे और काम से चले गये।