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जैसे ही उसका हाथ मेरी चूत पर पड़ा, मेरा दिल धक से रह गया। सुरेश ने जब देखा कि मैंने कोई विरोध नहीं किया है तो धीरे से मेरे साथ बगल में लेट गये। अपना पजामा उन्होंने ढीला करके नीचे खींच दिया। उनका कड़कड़ाता हुआ लण्ड बाहर निकल पड़ा। अब वो मेरे ऊपर चढ़ने लगे और मुझ पर जैसे काबू पाने की कोशिश करने लगे। मैंने भी सुरेश की इसमें सहायता की और वो मेरे ऊपर ठीक से पसर गये और लण्ड को मेरी चूत पर टिका दिया।

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