बोली- यार गिरा दो !
और फिर मैं उसको रगड़ मारता रहा और उसके वक्ष पर अपना पानी गिरा दिया। इसके बाद वह बोली- अब तुम सो जाओ !
समय देखा तो सुबह के चार बज गए थे और थकान अलग थी, मैं सो गया। सुबह राखी ने साढ़े दस बजे जगाया, बोली- उठो और फ्रेश हो जाओ !
मैं नहा कर आ गया, नाश्ता किया और बोला- राखी मैडम, आप ओ के हो?
बोली- मैं अच्छी हूँ, बहुत मज़ा आया।