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यह सब देख कर मेरा दिल वासना के मारे मचल उठता था। यह सब मेरे नसीब में कभी नहीं था। मेरा दिल भी करता था कि मैं भी बेशर्मी से नंगी हो कर चुदवाऊँ, दोनों टांगें चीर कर, पूरी खोल कर उछल-उछल कर लण्ड चूत में घुसा लूँ। पर हाय ! यह सब मेरे लिये बीती बात थी। तभी मुझे विचार आया कि कहीं अंजलि को बच्चा ठहर गया तो ?

मैं विचलित हो उठी।

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