About:

एक दिन मैं मन कड़ा करके तैयार होकर मयंक के पापा से मिलने उनके शहर चली गई। उनका नाम सुरेश था, मेरी ही उमर के थे। उनकी आँखों में एक नशा सा था। उनका शरीर कसा हुआ था, एक मधुर मुस्कान थी उनके चेहरे पर। एक नजर में ही वो भा गये थे। उनकी पत्नी नहीं रही थी। पर वे हंसमुख स्वभाव के थे। दोनों परिवार एक ही जाति के थे।

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