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उसकी चेष्टा केवल अपनी चूत में एक लंड डलवाने कि थी. उसके तन बदन में आग लगी थी और आग में जलती वो इस आग को बुझाना चाहती थी. उसे बुझाने का एक ही तरीका उसे सुझा. वो बिस्तर से उठ खड़ी हुई और जल्दी से अपनी साड़ी उतार फेंकी. फिर तारा को धीरे से बिस्तर के किनारे खिसका के उसके और महेश के बीच लेट गयी. उसकी साँसे तेज चल रही थी.

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