तभी उसने लण्ड गाण्ड से बाहर निकाल लिया। “आह्ह्ह क्या हुआ मोनू . . . मार ना मेरी . . . ”
“तेरी भोसड़ी कौन चोदेगा फिर . . . चल सीधी हो जा। ” उसकी गालियाँ उसका उतावलापन दर्शाने लगी थी। मैं जल्दी से सीधी हो गई। मुझे मेरी गाण्ड में लण्ड के बिना खाली खाली सा लगने लगा था। मोनू की आँखें वासना से गुलाबी हो गई थी।