मैं अपनी चूत भी उसके निशाने पर लाने यत्न कर रही थी। उसने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से सहलाया और मेरी आँखों में देखा। “दीदी, तू बहुत प्यारी है . . . अब तक तेरी चुदाई क्यूँ नहीं की. . . ”
“मोनू, हाय रे . . . तुझे देख कर मैं कितना तड़प जाती थी . . . तूने कभी कोई इशारा भी नहीं किया . . . और मेरा इशारा तो तू समझता ही नहीं.