अंदर नंगी भाभी और बाहर उसका नंगा देवर दिवाना। दोनों ही अपने अपने कारणॊ से अधूरे और प्यासे थे। देवर तो पहले से ही पागल हो चुका था और रश्मी की बुर चोदने के लिये तड़फ़ रहा था, और रश्मी उसे अभी और थोड़ी चिंगारी और वज्रपात की जरुरत थी अपने ही देवर के साथ अवैध
संबंध बनाने के लिये। औरत दो ही कारणों से अपनी लक्षमण रेखा को लांघती है पहला यदी पति इस लायक है तो वो उसे बचाने के लिये अपने घर की दहलीज लांघ कर यम के दरबार से भी अपने पति के प्राण वापस ले आती है और दूसरा यदि वो नालायक है और उसके मनोभावों को नहीं समझता तब वो इस दिवार को लांघ कर लाती है अपना यार और फ़िर शुरु होता है पति-पत्नी और “वो” का अंतहीन सिलसिला ।