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“क्या नाम है तुम्हारा ?” मैने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया. “आरती” कहकर वो शर्मा सी गयी. “बहुत सूंदर नाम है” मैने कहा “चाय पियोगी आरती ?’मेरे मूह से अपना नाम सुनकर उसने अचानक मेरी देखा “आप तकलीफ़ क्यों करते हो बाबूजी ?””अरे तकलीफ़ कैसी आरती , मैं अपने लिए तो बना ही रहा हूँ तुम भी पी लेना” मुझे बार बार उसका नाम लेकर बुलाने में मज़ा आ रहा था.

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