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“ठीक है बाबूजी , बना लीजिए” वो फिर मुस्कुराइ . अब मुझे उसकी मुस्कुराहट और अच्छी लगी. मैं किचन में चाय बना रहा था और मन में उल्टे सीधे विचार आने लगे. चाय बनाने में ध्यान कहाँ लगता. आँखो के सामने आरती की खूबसूरत मुस्कुराहटघूम रही थी. चाय उबल कर बाहर निकल गयी. “क्या हुआ बाबूजी ?” आरती ने आवाज़ लगाकर पूछा.

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