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ठीक है आरती रानी ?” मैने पूछा” ठीक है बाबूजी” उसके हाँ कहते ही मेरी जान में जान आई . मैने आरती को अपनी बाहों में उठा लिया और ला कर बेड पर लिटा दिया. बिल्कुल फूल क़ी तरह कोमल थी आरती. हल्की सी, छोटी सी और प्यारी सी” अब बताओ आरती रानी , किससे डर लगता है तुम्हे ” मैं उसके पास बैठ गया और सिर पर हाथ फेरने लगा” बाबूजी आप मुझे बार बार आरती रानी कहकर क्यों पुकारते हो ? मैं कहीं क़ी रानी थोड़े ना हूँ .

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