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वही कातिलाना मुस्कुराहट जिसने मुझे पागल किया थामैं पागलों क़ी तरह उसके होंठो को चूमने लगा . थोड़ी देर बाद आरती भी मेरा साथ देने लगी . आरती ने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे रख लिया और मेरा चेहरा अपने होंठों पर दबाने लगी . मेरे होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगी , मेरे होंठ अपने दाँतों से काटने लगी. पता नही कितनी देर तक हम दोनो एक दूसरे को चुसते रहेकितने रसीले होंठ थे आरती के ,ऐसा लगा मानो मैं शहद पी रहा था, इतने मीठे होंठ मैने आज तक नहीं चखे थे जब हम अलग हुए तो मैने कहा “आरती रानी , मेरा मन कर रहा है कि मैं तुम्हारे ये कोमल कोमल गाल भी चूसू “”फिर तो आपको एक पाउडर का डिब्बा भी दिलाना पड़ेगा बाबूजी ” कहकर आरती खिलखिलाकर हंस पड़ी.

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