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मैं ठगा सा खड़ा अपनी किस्मत पर आश्चर्य करते हुए अलका के तराशे हुए बदन को निहार रहा था. ऊपर वाले ने कहीं भी कोई कमी, कोई गलती नही छोड़ी थी अलका के शरीर को बनाने में. अलका की आवाज़ ने मेरा ध्यान तोडा – नीरू अगले दो तीन घंटे में तुम जैसा चाहो वैसे इस बदन को निहार कर छू कर खूब परख लेना. अब जरा वो गोल्डन लिक्विड वाली बोतल उठा कर खोलो और मेरे पास लाओ.

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