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उसकी एक गोलाई को पकड़ लिया . कितनी सख़्त चुचि थी आरती क़ी फिर दूसरी गोलाई को पकड़ कर बहुत देर तक दबाता रहा . इतना दबाने पर भी चुचियाँ नरम नही हुई . अब मेरा मन आरती क़ी गोलाइयाँ चूसने के लिए बेताब हो रहा था” क्या हुआ बाबूजी दिल मिला या नही ” आरती आँखे बंद किए हुए बोली”नहीं मिला मेरी जान . अब क्या करूँ आरती रानी” मैने उसका स्तन ज़ोर से दबा दिया”उफ्फ बाबूजी , ये क्या करते हो ?अगर नहीं मिला तो ऐसे दबाने से थोड़े ही मिल जाएगा , चोली उतार कर ढूँढ लो ना “आरती गरम हो चुकी थीमैंभी तो यही चाहता था .

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