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बसों की हड़ताल थी इसलिए हमें टैक्सी करनी पड़ी। सर साथ में थे इसलिए रास्ते भर हमने ज्यादा बातचीत नहीं की और सर ने मुझे करीबन ७ बजे और वरुण को मेरे बाद टैक्सी से ही हमारे घर छोड़ा। इस एक्सपेरिएंस के बाद मुझे तो पूरा यकीन हो गया भले वरुण बाहर से दिखाता न हो . . पर उसके मन में एक सॉफ्ट कार्नर जरूर है मेरे लिए .

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