मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे जबकि सर्दी का मौसम था। और फिर दीदी बोली- धीरे मार ! तूने तो मेरी चूत ही फ़ाड़ दी। मैंने कहा- अभी तो कुछ नहीं हुआ है, अभी तो काम बाकी है !
मैंने तुरंत दीदी की गांड में घुसा दिया। फिर क्या था, दीदी चिल्लाने लगी और बोली- साले, तूने तो आज मेरी गांड भी फ़ड़ दी और मेरी चूत भी !
मैंने कहा- अभी तो चूचियाँ भी बाकी हैं !
मैंने झट से चूचियों पर कब्ज़ा कर लिया और उन्हें दबाने और चूसने लगा और मुंह में लण्ड की पिचकारी मार दी।