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“रवि ने अपनी ग्लास को लीना के चहरे के नजदीक ला कर उसके मदमस्त होंठों से लगा दिया . लीना एक साँस मे ग्लास मे जितना था (आधे पैग से भी ज्यादा ) गटक लिया और लगी खांसने . अपना मुहं बिगाड़ते हुए बोली , “उफ़ , कैसी कड़वी है यह शराब . “रवि हंसने लगा . फिर लीना को अपने क़रीब खींच कर उसके होंठों पर पड़ी शराब की कुछ बूंदों को चाट लिया और बोला , “हमे तो कड़वी नही लगाती .

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