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“अगले दिन से नुपुर खूब सज धज कर रहने लगी और बाबुजी केसामने आते ही अपनी पल्लू गिरा कर उनको अपनी चुन्ची कि दिखानेलगी. बाबुजी भी नुपुर कि चुन्ची कि घुर घुर कर देखा कर्तेठे और हमारी आंख बचा कर अपनी लुंड को मसलते रहते थे. मैभी एह सब देख कर गरम होता था और सोचता रहता था कि कब मैं अपनी या सास कि छूट को अपने लुंड का पानी से नहालौंगा.

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