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” इतना सुनते हिबबुजी ने अपना तन्तानाया हुआ लुंड नुपुर कि छूट के दरवाजे पे रखकर अपने दोनो तों से उसकी चुन्ची पाकर लिया और एक जोर दर्दाक्खा मर कर अपना ९” का खरा कुंद नुपुर कि छूट मी एक ही बार मेडल दिया. नुपुर इस जोर दर झटके सह न पी और उसकी मुँह से एक्चिख निकल गयी. तब बाबुजी नुपुर से बोले, “चुप हरामजादी,वैसे तो तेरी छूट हमेशा चुदास से भरी रहती है, और आज जब्मैने अपना लौरा तेरे छूट मी दिया तो चिल्लाती है.

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