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ले मैअब जह्रने वाला हूँ, अपनी तंगो को और फैला, मैं तेरी छूट मी अपनालुन्द का अमृत डालने वाला हूऊऊउन्. ” इतना कहने के बाद बाबुजी जिका लुंड नुपुर कि छूट के अन्दर उलटी कर दी, और नुपुर आंख बन्द्कर्के अपनी छूट कि झरने आनंद लेटी रही. बाबुजी और नुपुर कि जबदस्त चुदाई देख कर मेरा लौरा भी अब तन्ना गया था और थोरी देर के बाद मैंने बाबुजी को नुपुर के उपेरसे उठाया और अपना लुंड नुपुर कि छूट मी पेल दिया.

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