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इसमे लुंड पेलने मी बहुत्माज़ा आ रह है. कितने दिनों से मैं ऐसे ही सुन्दर चिकने छूट कोचोड़ने के लिए आतुर था. आज मेरी मन कि मुराद पूरी हो रही है. क्यों मा, क्या तुमको मेरे लुंड से अपनी छूट मरवाने मी मज़ा आ रहहाई?”मा भी अपनी चूतर उठा उठा कर मेरे धक्के के जवाब देतिजा रही थी और मुझको चूम रही थी, फिर मा ने मुझ्सेपुचा, “क्यों बेटे मेरी छूट छोड़ने मी तुझको मजा आ रह है न?मेरी चुतर पर लेटने से तुझको मज़ा आ रह है कि नही, तुझ्कोताक्लीफ़ तो नही हो रह है?” “आरे नही मा, तकलीफ कैसा? मुझको तुम्हारी छूट मी लुंड दल कर छोड़ने मी बहुत मज़ा आ रह है.

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