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इस समय नुपुर बबुजीके ऊपर बैठ कर उनका लुंड अपने छूट से छोड़ रही थी. वो जबुचल उचल कर धक्के मर रही थी तो उसकी चुन्ची हवा मी उचाल्राहे थे और वो जोर जोर सिसकी मर कर बुबुजी के लुंड पर अप्निचुतर उचल कर अपनी छूट चुद्वा रही थी. हमलोग को फारिग होतेदेख कर नुपुर ने मेरे और अपनी मा से बोली, “देखो, देखो बेटा और्दमद चूड़ी रंदिओं देखो, कैसे मेरे ससुर का लुंड मेरी छूट कंदर बाहर हो रह है.

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