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उसने प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराते हुए कहा कि उसे डरने की कोई ज़रुरत नहीं है और वह बेधड़क उसे सच सच बता सकती है। प्रगति कुछ नहीं बोली और सिर झुकाए बैठी रही। शेखर उसके सामने आ गया और उसकी ठोडी पकड़ कर ऊपर उठाई तो देखा कि उसकी आँखों में आँसू थे। शेखर ने उसके गालों से आँसू पौंछे और उसे प्यार से अपने सीने से लगा लिया।

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