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शायद यह उसके धन्यवाद करने का तरीका था कि शेखर ने उसके साथ इतनी सुहानुभूति बरती थी। शेखर थोड़ा अचंभित था। वह सोच ही रहा था कि क्या करे !

जब प्रगति ने अपनी जीभ शेखर के मुँह में डालने की कोशिश की और सफल भी हो गई। अब तो शेखर भी उत्तेजित हो गया और उसने प्रगति को कस कर पकड़ लिया और जोर से चूमने लगा। उसने भी अपनी जीभ प्रगति के मुँह में डाल दी और दोनों जीभों में द्वंद होने लगा।

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