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उसे बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था कि गोलू जवान हो गया होगा. “मामी, मुंबई कैसी है?” महेश ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा. “ठीक ही है. ” वो बोली. उसे पता नहीं क्यूँ ऐसा लगा कि महेश उसके ब्लाउस कि गली में झाँक रहा है. पैरों के बीच एक हलकी सी तीस उठी. उसका चेहरा लाल हो गया. “क्या हुआ मामी?” महेश के पूछने पर वो बोली, “कुछ नहीं, गर्मी कुछ ज़्यादा है, है ना?”

“है तो! मामी मैं कपडे बदल लूं अंदर जा कर?” उसने देखा कि महेश नाश्ता और चाय, दोनों खत्म कर चूका है.

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