ऊपर उसने कुछ नहीं पहना था. चंदा उसे टकटकी लगा कर देखती रही. उसकी नज़र को अपने लंड पर देख महेश उत्तेजित हो उठा. पुछा, “क्या बात है मामी?”
“कुछ नहीं. ” वो बोली और सारे प्लेट गिलास इत्यादि उठा कर किचन कि ओर चल पड़ी. उसकी साँसे तेज हो चली थी. “मामी मैं ज़रा बाहर घूम के आता हूँ”
“हाँ ठीक है”
जब उसने महेश के निकलने के बाद दरवाज़े के बंद होने कि आवाज़ सुनी तो उसके कदम न जाने क्यों बाथरूम कि ओर बढ़ चले.